panchtantra katha, vishu sharma’s panchtantra story, motivational story about success and pleased life | कभी ऐसे व्यक्ति को सलाह न दें जो मूर्ख है, वरना हमारा ही नुकसान होना तय है, मूर्ख बेकार तर्क-वितर्क करते हैं और हमारे लिए परेशानियां बढ़ाते हैं

39 मिनट पहले

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  • आचार्य विष्णु शर्मा ने की थी पंचतंत्र की रचना, पांच भागों में विभाजित है पंचतंत्र

पंचतंत्र की कथाओं में सुखी और सफल जीवन की कई बातें बताई गई हैं। आचार्य विष्णु शर्मा ने पंचतंत्र की रचना की थी। पंचतंत्र को पांच भागों में विभाजित है, इसमें एक मित्रभेद नाम का अध्याय है। मित्रभेद अध्याय में मित्र और शत्रु की पहचान से जुड़ी कथाएं हैं। इस अध्याय की एक सीख ये है कि कभी भी मूर्ख को उपदेश नहीं देना चाहिए।

पंचंतंत्र में लिखा है कि-

उपदेशो हि मूर्खाणां, प्रकोपाय न शान्तये।

पयःपानं भुजडाग्नां केवल विषवर्धनम्।।

इस श्लोक का सरल अर्थ यह है कि किसी मूर्ख को दिया गया ज्ञान या सलाह, उसके क्रोध को बढ़ाने वाली होती है। जिस तरह सापों को दूध पिलाने से उनका विष ही बढ़ता है।

इस नीति से जुड़ी कथा

कथा के अनुसार किसी जगंल में एक बहुत बड़ा पेड़ पर गोरैया का एक जोड़ा रहता था। एक दिन बहुत तेज बारिश होने लगी। बारिश से बचने के लिए गोरैया अपने बनाए हुए घोंसले में जाकर बैठ गई। कुछ देर बाद उस पेड़ के नीचे एक बंदर आकर खड़ा हो गया। वह पूरा भीग चुका था। ठंड से कांप रहा था।

वह बंदर मूर्ख था। उसने अपने लिए कोई घर नहीं बनाया और बारिश में घूमकर परेशानियों का सामना कर रहा था। बंदर को परेशान देख गोरैया ने उसे खुद का एक घर बनाकर उसमें आराम से रहने की सलाह दी।

गोरैया की सलाह को बंदर ने अपना अपमान समझ लिया। बंदर को लगा कि गोरैया के पास अपना घोंसला है और बंदर के पास खुद का घर न होने की वजह से वह गोरैया उसका मजाक उड़ा रही है। इसी बात से गुस्सा होकर उस मूर्ख बंदर ने उसका घोंसला तोड़ दिया और उसे भी बेघर कर दिया।

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